छत्तीसगढ़

इमरान खान ने भेंट में मिली तीन घड़ियां बेच कर कमाए 3.6 करोड़ रुपये, रिपोर्ट्स से हुआ खुलासा

नईदिल्ली I पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान नित नए आरोपों में घिर रहे है। वे दूसरे देशों के प्रमुखों से मिले तोहफे बेचने के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। बुधवार को मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा किया गया है कि पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधान मंत्री इमरान खान ने गिफ्ट में मिली तीन घड़ियों को एक स्थानीय घड़ी डीलर को बेचकर लाखों रुपये कमाए। रिपोर्ट्स में एक आधिकारिक जांच के हवाले से बताया गया है कि पद पर रहते हुए इमरान खान ने भेंट में मिली तीन ज्वैल क्लास की घडियों को एक स्थानीय घड़ी डीलर को अवैध रूप से बेचकर 36 मिलियन रुपये कमाए। ये घड़ियां पहले मीडिया में रिपोर्ट किए गए तोशाखाना उपहारों के अलावा थीं।

154 मिलियन रुपये से अधिक कीमत की थी तीनों घड़ियां
एक आधिकारिक जांच के विवरण के अनुसार, खान ने प्रधान मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इन ज्वैल क्लास की घड़ियों से लाखों रुपये कमाए। जांच में कहा गया है कि इन घड़ियों की सामूहिक रूप से  कीमत 154 मिलियन रुपये से अधिक थी। ये घड़ियां उन्हें प्रधानमंत्री रहते हुए विदेशी नेताओं द्वारा उपहार में दी गई थीं।

इनमें सबसे महंगी घड़ी (10.1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य) तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा अपने मूल्य के 20 प्रतिशत पर रख ली गई थी। आधिकारिक तौर पर इस घड़ी का मूल्यांकन 10.1 करोड़ रुपये किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि उन्होंने इसे 5.1 करोड़ रुपये में बेचा और सरकारी खजाने में 2 करोड़ रुपये जमा किए, इस प्रकार 3.1 करोड़ रुपये की कमाई की। इसी तरह उन्होंने बाकी दोनों घड़ियों को उसकी वास्तविक कीमत से आधी कीमत पर बेचा गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स ने किया खुलासा 
 मीडिया रिपोर्ट्स ने खुलासा किया गया है कि दस्तावेजों और बिक्री रसीदों से खुलासा हुआ है कि तोशाखाना से उन उपहार में दी गई घड़ियों को अपनी जेब से खरीदने के बजाय, पूर्व प्रधानमंत्री ने पहले घड़ियां बेचीं और फिर प्रत्येक का 20 प्रतिशत सरकारी खजाने में जमा किया।

क्या कहता है पाकिस्तान का कानून
पाकिस्तान के कानून के अनुसार, किसी विदेशी राज्य के गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त कोई भी उपहार स्टेट डिपॉजिटरी या तोशाखाना में रखा जाना चाहिए। किसी भी सरकारी अधिकारी को मिले उपहार की तुरंत सूचना देनी होती है, जिससे उसकी कीमत का आकलन किया जा सके। उपहार जमा करने के बाद ही प्राप्तकर्ता एक विशिष्ट राशि का भुगतान करके उपहार को अपने पास रख सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा किया गया है कि तोशाखाना के दस्तावेजों से पता चला है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने मित्र खाड़ी देशों के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा उपहार में दी गई इन तीन महंगी घड़ियों की बिक्री से 3.6 करोड़ रुपये की कमाई की थी। जाहिर है कि पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा इन उपहारों को तोशाखाना में कभी जमा नहीं किया गया था। 

इमरान बोले थे- मेरे तोहफे-मेरी मर्जी
इससे पहले तोशखाना विवाद पर अपना जवाब देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि वे उनके उपहार थे, इसलिए यह उनकी पसंद थी कि उन्हें रखना है या नहीं। इमरान खान ने इसे लेकर कहा कि वो तोहफे मुझे मिले थे इसलिए यह मेरी मर्जी है कि मैं उन्हें रखूं या बेचूं।