छत्तीसगढ़

क्या सुशांत सिंह राजपूत जिंदा होते तो BJP-शिवसेना में हो चुका होता गठबंधन ?

मुंबई। शिवसेना के लगभग सारे एमएलए कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन के पक्षधर नहीं थे। यह बात खुद पार्टी विधायकों ने ही बताई है। महा विकास अघाड़ी सरकार बनने के लगभग एक साल बाद ही शिवसेना विधायकों ने एनसीपी-कांग्रेस से पीछा छुड़ाने की मांग शुरू कर दी थी। विधायकों को जब भी मौका मिला, उन्होंने मुख्यमंत्री तक अपनी बात रखी भी। लेकिन, पार्टी विधायकों का कहना है कि बीजेपी के कुछ नेताओं ने ठाकरे परिवार के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला होता तो डेढ़ साल पहले ही शिवेसना वापस बीजेपी के साथ गठबंधन कर लेती। ‘स्वाभाविक सहयोगियों’ के बीच वापस गठबंधन में रुकावट का सबसे बड़ा कारण बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत बन गया।

शिवसेना के 99% एमएलए बीजेपी से गठबंधन के पक्षधर’

शिवसेना के 99% एमएलए बीजेपी के साथ गठबंधन के पक्षधर रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने पार्टी विधायकों से बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट दी है। लेकिन, कुछ भाजपा नेताओं की ओर से ठाकरे परिवार पर किए गए निजी हमलों की वजह से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ‘अधिकतर शिवसेना एमएलए के (बीजेपी के साथ फिर से गठबंधन के) सुझावों को ठुकरा दिया। शिवसेना के कुछ एमएलए ने यह दावा किया है। विधायकों ने बताया है, ‘शिवसेना के 99 फीसदी विधायक, जिसमें वर्तमान में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को समर्थन करने वाले भी शामिल हैंI

‘बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी से बेहतर थी’

लेकिन, इन विधायकों के मुताबिक उद्धव ठाकरे ने विधायकों से कहा कि बीजेपी के साथ गठबंधन इसलिए संभव नहीं है, क्योंकि बीजेपी नेताओं के उनके परिवार पर हमले के चलते वह निजी तौर पर आहत हैं। विधायकों के अनुसार इन आरोपों में उनके बेटे आदित्य ठाकरे पर बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत को लेकर लगाए गए सनसनीखेज आरोप भी शामिल हैं। शिवसेना विधायकों के मुताबिक ऐसा लगाता है कि मंगलवार को भी मुख्यमंत्री ठाकरे के साथ बैठक में मौजूद कुछ पार्टी एमएलए ने कहा कि ‘बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी से बेहतर थी।’

सुशांत सिंह राजपूत की मौत बनी गठबंधन में अड़चन?

शिवसेना विधायक दीपक केसरकर ने दावा किया कि ‘मैं और कई और एमएलए मुख्यमंत्री से कहते रहे हैं कि कांग्रेस और एनसीपी की जगह बीजेपी के साथ जाना बेहतर है, क्योंकि यह स्वाभाविक सहयोगी है। हमारा कम से कम 1.5 साल पहले ही बीजेपी के साथ गठबंधन हो गया होता, अगर कुछ बीजेपी नेताओं ने उद्धव ठाकरे के परिवार के खिलाफ आरोप नहीं लगाए होते। आरोपों से उद्धव जी को धक्का लगा और इसी वजह से अभी तक गठबंधन नहीं हो पाया।’ शिवसेना के एक और एमएलए ने कहा कि जब भी विधायकों ने बीजेपी के साथ गठबंधन करने का मुद्दा उठाया तो ठाकरे ने यही कहा, ‘मैंने किसी के खिलाफ कोई निजी हमला नहीं किया है। लेकिन, मेरे परिवार पर हमला किया गया है; मैं उनके साथ कैसे जा सकता हूं?’ मतलब, अगर सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत नहीं हुई होती तो शिवसेना कब की बीजेपी के साथ जा सकती थी।

निजी आरोपों से उद्धव आहत हुए- शिवसेना एमएलए

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने आरोप लगाया था कि आदित्य ठाकरे का अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत में हाथ है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा काफी गरम हो गया था। बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ठाकरे पर ‘भ्रष्टाचार में शामिल’ होने के भी आरोप लगा चुके हैं। केसरकर के मुताबिक, ‘हालांकि मैं बीजेपी के साथ गठबंधन को बेहतर बताता रहा, लेकिन उद्धव जी के परिवार वालों के खिलाफ आरोपों की वजह इसमें दिक्कत हुई। ऐसे निजी आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए थे। अबतक किसी ने भी ठाकरे परिवार के खिलाफ निजी हमले नहीं किए थे। इसके चलते दोनों पार्टियों के साथ आने में रुकावट पैदा हो गई।’

शिवसेना में विद्रोह की वजह एनसीपी?

दीपक केसरकर ने आगे बताया कि एनसीपी के साथ दिक्कत ये है कि वह शिवसेना के विरोधियों को ज्यादा फंड आवंटित करती है। उन्होंने कहा, ‘कोई भी एमएलए दोबारा से चुनाव जीतना चाहेगा। जबकि, एनसीपी अपने उम्मीदवारों को ज्यादा फंड उलब्ध करवाती है, जिन्हें शिवसेना के विधायकों ने हराया था। पिछले 1.5 साल से हमारे विधायक इसको लेकर शिकायतें कर रहे हैं। लेकिन, इन शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। संभवत: मौजूदा परिस्थिति के लिए यही जिम्मेदार है।’