छत्तीसगढ़

क्या रिकवरी के बाद भी आपके बच्चों में हैं कोरोना जैसे लक्षण? रहें सावधान, स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

नईदिल्ली I दुनियाभर में कोरोना से अभी जंग जारी है. कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक होने के बाद भी कई लोगों में लॉन्ग कोविड-19 की समस्याएं देखी जा रही हैं. ज्यादातर ये समस्याएं व्यस्कों में देखी गई हैं. कोरोना से रिकवरी होने के बाद भी कई दिनों तक लोगों में थकान और कमजोरी की समस्याएं आम तौर पर देखी गई हैं, लेकिन अब बच्चों में भी लॉन्ग कोविड के मामले देखे गए हैं. कोरोना (Corona) से ठीक होने के बाद भी बच्चों में कई तरह की समस्याएं देखी गई है. डेनमार्क में एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि बीमारी से रिकवर होने के बाद भी करीब 46 फीसदी बच्चों में कम से कम 2 महीने तक कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे हैं. 

स्टडी के दौरान शोधकर्ताओं ने डेनमार्क में बच्चों के राष्ट्रीय स्तर के नमूने का इस्तेमाल किया और संक्रमण के पूर्व इतिहास वाले बच्चों के नियंत्रण समूह के साथ कोविड पॉजिटिव मामलों का मिलान किया. इस रिसर्च को द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल्स में प्रकाशित किया गया है.

बच्चों में लॉन्ग कोविड संक्रमण के लक्षण

लैसेंट की स्टडी के मुताबिक 0-14 वर्ष की आयु के 46 फीसदी बच्चों में व्यस्कों और बुजुर्गों की तरह लॉन्ग कोविड लक्षण पाए गए. शोध में पाया गया कि ये बच्चे संक्रमण से ठीक होने के बाद भी कम से कम दो महीने तक लॉन्ग कोविड की समस्याओं से पीड़ित हो सकते हैं. 0-3 वर्ष के आयु वर्ग में 40 फीसदी बच्चों में कोविड-19 (1,194 बच्चों में से 478) का निदान किया गया, जिन्होंने दो महीने से अधिक समय तक लक्षणों का अनुभव किया. वही 4-11 आयु वर्ग में, यह अनुपात 38 फीसदी था जबकि 12-14 आयु वर्ग में यह अनुपात 46% फीसदी रहा.

स्टडी का मकसद?

स्टडी का समग्र उद्देश्य बच्चों में लंबे समय तक चलने वाले कोविड लक्षणों के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता, और स्कूल या डे केयर से अनुपस्थिति का निर्धारण करना था. डेनमार्क के कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी अस्पताल के प्रोफेसर सेलिना किकेनबोर्ग ने कहा कि सभी बच्चों पर महामारी के दीर्घकालिक परिणामों पर आगे के शोध महत्वपूर्ण होंगे.

कोरोना से रिकवरी के बाद बच्चों में किस तरह के लक्षण?

शोध के दौरान बच्चों में लॉन्ग कोविड (Covid-19) के 23 सबसे आम लक्षणों के बारे में पूछा गया. 0-3 साल के बच्चों में सबसे अधिक शरीर पर चकत्ते और पेट दर्द की समस्या देखी गई. वही 4-11 वर्ष की आयु वाले बच्चों में याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और शरीर पर चकत्ते की परेशानी देखी गई. वहीं 12-14 वर्ष की आयु वाले बच्चों में थकान, याद रखने या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी सबसे आम लक्षण थे. बीएलके अस्पताल, दिल्ली के बाल रोग विभाग के डायरेक्टर और प्रमुख डॉ जेएस भसीन भी मानते हैं कि कुछ बच्चों को ठीक होने में अधिक समय लगा.