छत्तीसगढ़

भाजपा में कलह: भूपेंद्र पटेल बदलना चाहते हैं सारे मंत्री, रूपाणी इससे खुश नहीं, डिप्टी CM पटेल और दूसरे करीबी पड़ सकते हैं खतरे में

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के साथ नितिन पटेल की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

गांधीनगर। गुजरात में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले भाजपा में कलह शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, मौजूदा डिप्टी CM नितिन पटेल और मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नाराजगी मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के कैबिनेट विस्तार को लेकर ही है। खबरें ये भी आईं कि नितिन पटेल ने मंगलवार रात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला से भी मुलाकात की। दोनों के बीच लंबी बातचीत भी चली।

वाघेला से मुलाकात की भी चर्चा
बताया ये भी जा रहा है कि नितिन पटेल ने मंगलवार की रात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला से मुलाकात भी की है और दोनों के बीच लंबी बातचीत भी हुई है। इसे लेकर भाजपा हाईकमान परेशान है।

कुर्सी पर खतरा मंडराया, तो खफा हुए नितिन?
सूत्रों के मुताबिक, भूपेंद्र पटेल पूरी कैबिनेट बदलना चाहते हैं, यानी 27 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। फोकस नए चेहरों और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर है। यह भी कहा जा रहा है कि डिप्टी CM नितिन पटेल को केवल मंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल किए जा सकता है। इसके पीछे कारण भी है। दरअसल, भूपेंद्र पटेल और नितिन पटेल दोनों ही पाटीदार समाज से हैं। ऐसे में CM और डिप्टी CM पर एक ही समाज के चेहरे बैठाने से हाईकमान भी बचना चाह रही है।

नितिन की नाराजगी यहीं से शुरू होती है। भूपेंद्र सिंह चूडासमा को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कौशिक पटेल भी खतरे के दायरे में हैं। तीनों ही विजय रूपाणी के करीबी हैं तो वे भी नाराज ही हैं।

सोमवार को मीडिया से हुई बातचीत में नितिन पटेल ने कहा था कि किसी संत, स्वामी या ब्रांड की तब तक जनता के बीच पूछ रहती है, तब तक वह बना रहता है।

सोमवार को मीडिया से हुई बातचीत में नितिन पटेल ने कहा था कि किसी संत, स्वामी या ब्रांड की तब तक जनता के बीच पूछ रहती है, तब तक वह बना रहता है।

3 घंटे तक चला मान-मनौव्वल का दौर
सूत्रों ने बताया कि भाजपा ने नाराज नेताओं को मनाने का जिम्मा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और गुजरात भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव को सौंपा। इन पदाधिकारियों ने तीनों नेताओं से 3 घंटे तक बातचीत की, पर कामयाबी नहीं मिली। संतोष और यादव ने मंगलवार को भूपेंद्र पटेल से उनके बंगले पर आधा घंटे तक बातचीत की। इसके बाद वहीं पर नितिन पटेल और भूपेंद्र सिंह को बुलाया गया। इन दोनों से भी करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा चली। विजय रूपाणी से भी फोन पर करीब एक घंटे तक बात की गई।

मुख्यमंत्री के बंगले पर हुई इस बैठक में पूर्व मंत्री कौशिक पटेल और पुरुषोत्तम रूपाला भी शामिल थे। हालांकि, अब तक कौशिक और रूपाला की नाराजगी की बात सामने नहीं आई है।

साल 2016 में आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद भी नितिन पटेल मुख्यमंत्री पद की रेस में थे। (विजय रूपाणी और नितिन पटेल की फाइल फोटो)

साल 2016 में आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद भी नितिन पटेल मुख्यमंत्री पद की रेस में थे। (विजय रूपाणी और नितिन पटेल की फाइल फोटो)

2016 में नितिन पटेल की बात माननी पड़ी थी
नितिन पटेल ने नाराजगी वाले तेवर पहली बार नहीं दिखाए हैं। 2016 में भी वित्त मंत्रालय न मिलने से नितिन पटेल नाराज हो गए थे। आखिरकार आलाकमान को उनके आगे झुकना पड़ा था और डिप्टी CM के साथ उन्हें वित्तमंत्री भी बनाना पड़ा था।