छत्तीसगढ़

कोरबा: हेड कांस्टेबल ने ज़ब्त की थी अवैध शराब, जिला कोर्ट ने कहा था कि उसे अधिकार नहीं, और दिया था विभागीय कार्रवाई करने का आदेश,हाईकोर्ट ने कहा-आदेश असंवैधानिक

याचिका में कहा गया कि कलंकित आदेश जो उसके हितों के विपरीत है जिला कोर्ट को ऐसे आदेश पारित करने का एक तरफा अधिकार नहीं है। - Dainik Bhaskar

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस हेड कांस्टेबल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के आदेश को असंवैधानिक बताया है। कहा कि बिना उसे सुने विभागीय कार्रवाई का आदेश देना गलत है। हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। हेड कांस्टेबल ने अवैध शराब जब्त की थी। इस पर जिला कोर्ट ने कहा था कि उसे अधिकार नहीं है। इसके साथ ही पकड़े गए आरोपियों को जमानत दे दी थी। 

दरअसल, कोरबा के उर्गा पुलिस स्टेशन में पदस्थ होने के दौरान हेड कांस्टेबल चंदन सिंह ने अवैध शराब जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दोनों के खिलाफ आबकारी एक्ट में कार्रवाई की गई। इस पर दोनों आरोपियों ने जिला कोर्ट में जमानत आवेदन दिया और बताया कि अधिनियम के तहत हेड कांस्टेबल को शराब जब्ती का अधिकार नहीं है। इसके बाद जिला कोर्ट कोरबा में दोनों आरोपियों को जमानत दे दी। 

जिला कोर्ट ने कहा था- अवैधानिक कार्रवाई के कारण ही जमानत मिली
आरोपियों को जमानत देने के साथ ही जिला कोर्ट ने इस बात का जिक्र किया कि हेड कांस्टेबल की ओर से की गई अवैधानिक कार्रवाई के कारण ही आरोपी जमानत प्राप्त करने के अधिकारी हुए हैं। आदेश पत्र की कॉपी पुलिस अधीक्षक कोरबा और वरिष्ठ पुलिस अफसरों को भेजी गई और हेड कांस्टेबल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसके खिलाफ चंदन सिंह ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से याचिका दायर की। 

याचिकाकर्ता ने कहा- कलंकित आदेश देने का एक तरफा अधिकार नहीं
याचिका में कहा गया कि कलंकित आदेश जो उसके हितों के विपरीत है जिला कोर्ट को ऐसे आदेश पारित करने का एक तरफा अधिकार नहीं है। उसका पक्ष सुने बिना इस तरह का आदेश मनमानापूर्ण, भेदभावपूर्ण और दूषित है। सुनवाई में हाईकोर्ट ने माना कि परिस्थिति को देखते हुए आरोपियों को जमानत दिया जाना उचित हो सकता है, पर याचिकाकर्ता को सुने बिना विभागीय जांच का आदेश गलत है। हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया।