छत्तीसगढ़

जीएसटी पेमेंट नहीं होने का बहाना बनाकर महासमुंद, कांकेर और कोरबा मेडिकल कॉलेज के आवेदन निरस्त, कांग्रेस ने कहा- यह केंद्र का छत्तीसगढ़ विरोधी रवैया

रायपुर, 9 जून। केन्द्र सरकार ने जीएसटी पेमेंट नहीं होने का बहाना बता कर छत्तीसगढ़ के महासमुंद कांकेर और कोरबा में इस वर्ष शुरू होने होने वाले मेडिकल कॉलेजों का आवेदन निरस्त कर दिया है। कांग्रेस ने केन्द्र के इस कदम को छत्तीसगढ़ विरोधी रवैया करार दिया है। 

प्रदेश में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए भूपेश बघेल सरकार ने महासमुंद, कांकेर और कोरबा में सौ-सौ सीटों का नया मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी की थी। जीएसटी और बेड की कमी का हवाला देकर तीनों मेडिकल कॉलेजों की अर्जी ही रद्द कर दी है। बताया गया कि सरकारी प्रक्रिया के अनुसार अगर आवेदन में कोई कमी थी तो उसे पत्र लिखकर सूचित किया जा सकता था, और इसका निराकरण भी हो सकता था।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आरपी सिंह ने अपने एक बयान में कहा कि जिस द्वेष की भावना से केंद्र की मोदी सरकार छत्तीसगढ़ की जनता के साथ व्यवहार कर रही है यह दुर्भाग्यपूर्ण है। केन्द्र सरकार अपनी तरफ से नए चिकित्सा संस्थानों को खोलने की कोई ठोस पहल तो कर नहीं रही जो राज्य सरकार इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बना कर आगे बढ़ रही उसके काम पर भी मोदी सरकार अड़ंगेबाजी कर रही है। एक तरफ जहां पूरे देश में कोरोना संक्रमण फैला हुआ है और केंद्र सरकार प्रभावी कदम नहीं उठा पा रही है। ऐसी विपरीत स्थिति में भी छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार अपने संसाधनों से ही इस संक्रमण का डटकर मुकाबला कर रही है।

भूपेश बघेल सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते ही छत्तीसगढ़ ऑक्सीजन सरप्लस स्टेट के रूप में उभर कर सामने आया है। इसको कोविड संक्रमण काल में भी छत्तीसगढ़ में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं हुई। बल्कि दूसरे राज्यों को भी पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई छत्तीसगढ़ से की गई। 15 वर्षों तक छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार रही लेकिन उन्होंने कभी भी स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के प्रयास नहीं किए।