छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: पेड़ लगाओ और पैसे कमाओ,वृक्षारोपण करने वालों को तीन साल तक मिलेंगे प्रति एकड़ 10 हजार रुपए, सीएम भूपेश ने की घोषणा

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने आवास परिसर में लगाया हर्रा और चार का पौधा। - Dainik Bhaskar

रायपुर। रविवार को छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नई योजना की शुरूआत की है। रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक वर्चुअल कार्यक्रम से इस योजना का आगाज कर दिया है। योजना का नाम है मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना। खाली पड़े खेतों में पेड़-पौधे लगाने वाले किसानों को अब इस योजना की वजह से 10 हज़ार रुपए सालाना दिए जाएंगे। योजना की शुरूआत करते हुए खुद मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना को छत्तीसगढ़ की राजीव गांधी किसान न्याय योजना के साथ भी जोड़ा गया है।

पौधा लगाने के लिए सीएम ने खुद ही खड्‌डा खोदा और बागवानी में अपनी दिलचस्पी दिखाई।

पौधा लगाने के लिए सीएम ने खुद ही खड्‌डा खोदा और बागवानी में अपनी दिलचस्पी दिखाई।

अब जिन किसानों ने इस 2020 के खरीफ वर्ष में में धान की फसल ली है, अगर वो धान की फसल के बदले अपने खेतों में वृक्षारोपण करते हैं, तो उन्हें आने वाले 3 सालों तक 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। योजना के तहत वन विभाग ने इस साल 99 लाख से अधिक पौधे रोपने की तैयारी की है, 2 करोड़ 27 लाख पौधे आम लोगों को बांटे जाएंगे।

पंचायतों को भी फायदा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत ग्राम पंचायतें अगर अपने पास मौजूद राशि से वृक्षारोपण करती है। तो एक साल बाद उन्हें 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, इससे पंचायतों की आय में वृद्धि होगी। इसी प्रकार संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के पास उपलब्ध राशि से यदि कर्मशियल तौर पर राजस्व भूमि पर वृक्षारोपण किया जाता है, तो पंचायत की तरह ही संबंधित समिति को भी 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से पैसे मिलेंगे।

दुर्ग जिले के ग्राम फुंडा में 20 एकड़ क्षेत्र में बनाए जा रहे जैव विविधता उद्यान का भूमिपूजन भी किया गया।

दुर्ग जिले के ग्राम फुंडा में 20 एकड़ क्षेत्र में बनाए जा रहे जैव विविधता उद्यान का भूमिपूजन भी किया गया।

जरूरत पड़ी तो काट सकते हैं पेड़
जब किसान खेतों में पेड़ लगाएंगे और अगर उन्हें काटना हो तो इसके लिए कोई विभागीय मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने योजना के तहत पेड़ों के काटे जाने का भी नियम सार्वजनिक की है। योजना के साथ सरकार ने कहा है कि अपने खेतों में लगाए गए वृक्षों की कटाई के लिए किसानों को भविष्य में किसी भी विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। अगर समितियां कर्मशियल यूज के लिए पेड़ लगाती है तो वृक्षों को काटने व विक्रय का अधिकार संबंधित समिति का होगा।

यह होगा फायदा
इस योजना के तहत जहां पेड़-पौधे लगेंगे वहां हरियाली होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि फलदार वृक्षों की वजह से बच्चों को पौष्टिक फलों का स्वाद घर पर ही मिलेगा, जिससे बच्चों के कुपोषण दर मे कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण संतुलित होगा और इमारती लकड़ियों के वृक्ष लगाने से किसानों को आर्थिक बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे गांवों और जंगलों की तस्वीर बदलेगी। इससे किसानों को आय का एक नया जरिया मिलेगा। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। हमारे गांवों में फिर से हरियाली दिखेगी।