छत्तीसगढ़

कोल इंडिया में फिर लागू हो फीमेल स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना, श्रमिक संघ प्रतिनिधियों ने की मांग

बिलासपुर। कोयला प्रबंधन ने स्पेशल फीमेल स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआर) योजना बंद कर दी है। इससे आश्रितों को नौकरी नहीं मिल रही है और कई महिला कर्मियों को मजबूरन काम करना पड़ रहा। श्रमिक संघ प्रतिनिधियों ने इस स्कीम को पुन: शुरू करने कहा है, ताकि महिला कर्मियों को वीआर लेने में सुविधा मिल सके। साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) समेत कोल इंडिया की अन्य आनुषांगिक कंपनियों में कार्यरत महिला कर्मियों के लिए प्रबंधन ने स्पेशल फीमेल वीआर स्कीम वर्ष 2014-15 में लागू की थी।

इसमें गैर तकनीकी महिला कर्मी को वीआर दिया गया, पर बाद में इस स्कीम को बंद कर दिया गया। इस स्कीम में जिन महिला कर्मियों की नौकरी 10 साल शेष बची है, उन्हें वीआर देकर उनके पुरूष आश्रितों को नौकरी दिया गया। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक पास रखी गई थी। प्रबंधन ने बाद में इस स्कीम को संशोधित कर नौकरी की शेष अवधि पांच साल निर्धारित कर दी।

तीसरी बार संशोधन करते हुए दो साल नौकरी शेष रहने पर ही नौकरी देने का प्रावधान रखा गया। आश्रित को नौकरी देने के बाद तीन वर्ष तक प्रशिक्षण अवधि में रखा जाना था, इस दौरान केवल स्टाइफंड देने दिया जाता। प्रशिक्षण अवधि में कार्य संतोषजनक मिलने पर आश्रित को स्थाई करने का प्रावधान रखा गया था। अब इस स्कीम के बंद होने से महिला कर्मियों का इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इस पर श्रमिक संघ प्रतिनिधियों ने भी आपत्ति जताते हुए कहा है कि प्रबंधन के समक्ष इस प्रस्ताव को प्रमुखता से रखते हुए स्पेशल फीमेल वीआर स्कीम शुरू कराने की कोशिश की जाएगी।

एपेक्स कमेटी की बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव

कोल प्रबंधन ने आगामी 22 जनवरी को एपेक्स जेसीसी व 23 जनवरी को मानकीकरण कमेटी की बैठक आयोजित की है। इस बैठक में प्रस्तावित एजेंडा के मुताबिक चर्चा होगी। साथ ही अन्य लंबित मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी। सीटू के उपमहासचिव वीएम मनोहर ने बताया कि बैठक में मेडिकल अनफिट, कलर ब्लाइंडनेस के साथ ही जिनकी मां को कार्यमुक्त कर दिया गया है, उन्हें योग्यतानुसार पदस्थापना देने के मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी। साथ ही कोरोना वैक्सीन में सभी कोल कर्मियों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा जाएगा।


बढी हुई दर से ग्रेच्यूटी लगाने का होगा प्रयास

कोल कर्मियों को 20 लाख बढ़ी हुई ग्रेच्यूटी का लाभ मार्च 2018 से दिया जा रहा है, जबकि अधिकारियों को एक जनवरी 2017 से दिया गया है। मनोहर ने कहा कि कंपनी बढ़ी हुई ग्रेच्यूटी की सीमा एक जनवरी 2017 से निर्धारित करे। इस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई थी, पर अभी तक सर्कुलर जारी नहीं किया गया। बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से पारित कराया जाएगा। ताकि एक जनवरी से 28 मार्च तक सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को बढ़ी हुई दर से ग्रेच्यूटी का फायदा मिल सके।