छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: युवक को कोरोना पॉजिटिव बताकर लाखों ऐंठे.. मौत के बाद RTPCR रिपोर्ट आई निगेटिव

बिलासपुर. कई अस्पताल इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए लोग़ों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। लोगों को कोरोना का डर दिखा कर लूटा जा रहा है। कोरोना की आड़ में निगेटिव मरीजों से भी मन चाहे पैसे लूटे जा रहे हैं।ऐसा ही एक ताज़ा मामला सोमवार को प्रकाश में आया है जिसमें अपोलो प्रबंधन का नया कारनामा उजागर हुआ है।

  एक 20 वर्षीय युवक की तबियत बिगड़ने पर उसे अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहाँ डॉक्टर पहले तो युवक को कोरोना पॉजिटिव बताए , फिर उसे अन्य कई बीमारियों से ग्रसित होने का दावा करते रहे। इसी बीच उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं जब मौत के बाद उसकी जांच कराई गई तो मृतक की रिपोर्ट नेगेटिव आई जिसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।जानकारी के मूताबिक मृतक को कोरोना पॉजिटिव बता कर उसके परिजनों से लाखों रुपए वसूल किए गए और बाद में उसकी रिपोट निगेटिव आ गई। वहीं इस पैसे के खेल में युवक की सांसें थम गई। 

बदनाम होते जा रहा अपोलो अस्पताल

जब जिले में अपोलो अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा था,तब लोग इसे संजीविनी समझ रहे थे, पर उन्हें क्या पता था जिसे वे संजीवनी समझ रहे हैं वो भविष्य में लोगों के लिए अभिशाप बन जाएगा। कहने को तो अपोलो अस्पताल में हर बीमारी का उपचार होता है पर यहाँ के डॉक्टर अब मरीज की जान बचाने के बजाय सिर्फ पैसे ऐंठने पर आमादा हैं। हाल ही में अपोलो अस्पताल के एक डॉक्टर के ऊपर इलाज के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगा है जिसका विरोध अभी भी जारी है। परिजनों के अलावा शहरवासी भी उस डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की बात कर रहे हैं। इससे पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें अपोलो अस्पताल के ऊपर कलंक लगा है इसके बावजूद अपोलो प्रबंधन अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा है। वैसे तो डॉक्टर भगवान का रुप होते हैं पर अपोलो अस्पताल के डॉक्टर यमराज बनते जा रहे हैं। यहां भर्ती मरीज के पीछे उनके परिजन लाखों खर्च करते हैं क्योकि उनके परिवार के  सदस्य की जान बच जाए पर अंत में उनके हाथ में लाश थमा दी जाती है।

आपको बता दें बैकुंठपुर के मनेन्द्रगढ़ में रहने वाले 20 वर्षीय युवक की बीते दिनों अचानक तबीयत खराब हुई और उसे आनन फानन में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर्स का कहना था की उसकी दोनों किडनी डैमेज हो चुकी है। साथ ही युवक को कोरोना पॉजिटिव भी बताया गया था,वही परिजनों की माने तो हॉस्पिटल में न ही उसका ढंग से इलाज हो रहा था और न ही उसे अपने परिजनों से मिलने दिया जा रहा था। परिवार वाले भी इस उम्मीद में पैसे पानी की तरह बहा रहे थे, कि उनके बेटे की जान बच जाए। पर ऐसा हुआ नहीं बल्कि उसकी हालत गंभीर होती चली गई, जिसके बाद मृतक को 4 दिनों पहले ही आईसीयू में रखा गया था। इस दौरन  युवक अपने परिजनों से मिलने की गुहार लगाता रहा और आखिर उसने 13 सितंबर की रात 9 बजे  दम तोड़ दिया।

मौत के बाद जब परिजनों ने बॉडी की मांग की तो उन्हें इनकार करते हुए कहा कि मरीज कोरोना पॉजिटिव था। लेकिन RTPCR रिपोर्ट के मुताबिक मृतक की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इस पूरे मामले में ये तो स्पस्ट हो गया कि कोरोना के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है। और डॉक्टरी के पेशे को बदनाम करने भी कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। वहीं देर रात दबाव बनाने के बाद अपोलो प्रबंधन ने शव को परिजनों को सौंप दिया है।